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इन तरीको से करे किसान धान की खेती कम पानी की जगह में भी होगा ताबड़तोड़ उत्पादन

पौधे लगाते समय किसानों को बीज उपचार के साथ-साथ मिट्टी का उपचार भी करना चाहिए, ताकि पौधे कीटों से प्रभावित न हों. स्वस्थ पौधों से लगाया गया धान का crop भी बंपर पैदावार देगा.

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इन तरीको से करे किसान धान की खेती कम पानी की जगह में भी होगा ताबड़तोड़ उत्पादन
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जून के दूसरे सप्ताह से धान की रोपाई शुरू हो जाती है. ऐसे में किसानों को रोपाई से पहले ही पौध तैयार कर लेनी चाहिए. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की अच्छी पैदावार के लिए अच्छी पौध होना बहुत जरूरी है. पौधे लगाते समय किसानों को बीज उपचार के साथ-साथ मिट्टी का उपचार भी करना चाहिए, ताकि पौधे कीटों से प्रभावित न हों. स्वस्थ पौधों से लगाया गया धान का crop भी बंपर पैदावार देगा.

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लंबे समय वाली किस्मों के लिए पौध तैयार करने का सही समय

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में कृषि विज्ञान निमतपुर के प्रभारी डॉ. एनसी त्रिपाठी ने बताया कि लंबे समय वाली धान की किस्मों के लिए अभी पौध लगाने का सबसे अच्छा समय है. लेकिन बारीक किस्मों के धान की पौध अभी नहीं बोनी चाहिए. रोपाई करते समय अगर किसान अच्छी किस्मों का चुनाव करते हैं और बीज और मिट्टी की जांच के बाद बुवाई करते हैं, तो किसानों की धान की फसल में कीट नहीं लगेंगे और उत्पादन भी अच्छा होगा.

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पौधशाला बुवाई से पहले भूमि शुद्धिकरण आवश्यक

डॉ. एनसी त्रिपाठी ने बताया कि पौध लगाने से पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई करें और मिट्टी को भुरभुरी बना लें. दो किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से ट्राइकोडर्मा डालें और जमीन की जांच भी कराएं. उसके बाद एक मीटर चौड़ाई रखते हुए क्यारियां बना लें. बीज की मात्रा के हिसाब से किसान क्यारियों की लंबाई रख सकते हैं. क्यारियां तैयार करने और उसमें पौधे लगाने से पानी की खपत कम होगी. इसके अलावा, किसान क्यारी की मेड़ पर बैठकर खरपतवार प्रबंधन भी कर सकते हैं. पौधे को कोई नुकसान नहीं होगा.

धान की पौध के लिए कितना बीज चाहिए?

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डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि खेत को अच्छी तरह से तैयार करने के साथ-साथ धान की किस्म का चयन भी बहुत जरूरी है. किसानों को सिर्फ अपने क्षेत्र के लिए अनुमोदित किस्मों का ही चुनाव करना चाहिए. 15 बीघा धान की रोपाई के लिए एक बीघा पौध तैयार करें और एक हेक्टेयर धान की रोपाई के लिए 20 से 25 किलो मोटा धान का बीज तैयार करें. बारीक धान और संकर किस्मों के लिए लगभग 15 से 17 किलो बीज की आवश्यकता होती है.

बीज शोधन भी बहुत जरूरी है

उन्होंने आगे बताया कि किसी प्रमाणित कंपनी से बीज खरीदें और उन्हें पानी में भिगो दें. साथ ही पानी में प्रति किलोग्राम बीज में ढाई ग्राम कार्बेन्डाजिम भी मिलाएं. बीजों को 24 घंटे पानी में भिगोने के बाद, उन्हें पानी से निकाल कर किसी gunny sack या पुआल से ढक दें. ढकने के बाद, जब हल्के स्प्राउट दिखने लगें, तो तैयार खेत में पानी छिड़कें और धान के बीजों को बिखेर दें.

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खाद की कितनी मात्रा डालें?

धान की रोपाई से करीब 25 दिन पहले नर्सरी तैयार कर लेनी चाहिए. जिस खेत में नर्सरी तैयार की जा रही है, वहां कुछ दिन पहले जुताई कर के खेत को खुला छोड़ दें. उसके बाद, नर्सरी की अच्छी बढ़वार के लिए 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में जुताई के समय 10 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद, 10 किलो डीएपी, 2.5 किलो जिंक सल्फेट मिट्टी में मिलाएं. इसके बाद 10 किलो यूरिया का छिड़काव करें. ताकि पौधे हरे रहें. जल्द ही रोपाई के लिए पौध तैयार हो जाएगी.

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