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Malhara News: सड़कों पर बैठे आवारा मवेशी हादसों का अंदेशा, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान

एक महीने मे मलहरा से मातगुवा के बीच हुए दर्जनों मवेशी हुए सड़क दुर्घटना का शिकार,बितो दो दिनों पहले भी ग्राम पंचयात गुलगंज के पास बोलेरो की टक्कर से एक गाय हुई दुर्घटना का शिकार

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सड़कों पर बैठे आवारा मवेशी हादसों का अंदेशा, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
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Malhara News/संदीप सेन गुलगंज जिला छतरपुर:- गाँव की मुख्य सड़कों आम रास्तों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहने से वाहन चालकों सहित राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे कभी भी दुर्घटनाएं घट सकती हैं। यातायात काफी खतरनाक हो गया है।गुलगंज मुख्य मार्ग पर मवेशियों का जमावड़ा यातायात के लिए एक बड़ी समस्या बन गई। दिन में ही नहीं बल्कि रात में भी इस मार्ग के विभिन्न गांव एवं शहरी क्षेत्र में सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा रहता है जिसके कारण यातायात काफी खतरनाक हो गया है। शहर की मुख्य सड़कों आम रास्तों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहने से वाहन चालकों सहित राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे कभी भी दुर्घटनाएं घट सकती हैं।

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मुख्य सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा के कारण लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही है परंतु जेएआरडीसीएल द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है और मवेशियों का जमावड़ा हटने का नाम नहीं ले रहा है। जानकारी हो कि लोग अपने अपने घरों में पशु धन के रूप में मवेशियों का पालन करते आ रहे हैं। बुंदेलखण्ड में घरेलू में मवेशियों को पशुधन के रूप में पूजा की जाती है और प्रतिवर्ष दिवाली के मौके पर पशुधन की पूजा अर्चना के लिए सोहराय एवं गोवर्धन पूजा उत्सव का आयोजन होते आ रहा है गुलगंज क्षेत्र में लोग अपने घरों में मवेशियों के पालने को झमेला समझने लगे और धीरे-धीरे गांव में मवेशियों की संख्या घटने लगी। किसान जहां पहले बैल एवं भैंसा से हल जोतते थे तथा कृषि कार्य में भी इनका उपयोग किया जाता था। परंतु अब इस ट्रैक्टर के युग में बड़े-बड़े किसान भी बैल या भैंसा रखना छोड़ ट्रैक्टर से खेती करने लगे हैं।

सड़क पर विचरण करते पशु

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बावजूद इसके अभी भी हर गांव में बड़ी संख्या में गाय बैल भैंस एवं भेड़ बकरी पाले जाते हैं, मवेशियों की संख्या घटते ही लोग गांव के चारागाह का अतिक्रमण कर मकान आदि बनाए जा रहे हैं जिसके कारण गांव के चरागाह लुप्त के कगार पर है और गांव के मवेशी बेसहारा होकर आश्रय के लिए भटकने लग जाते हैं। वह विचरण के लिए गांव की चरागाह की खूब की तलाश करते हैं परंतु जगह नहीं मिलने पर वे मजबूरन मुख्य सड़क पर ही विचरण करने लग जाते हैं। छतरपुर से सागर मार्ग पर जहां-तहां सड़क पर मवेशियों का झुंड देखा जा रहा है। जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है। सड़क पर विचरण कर रहे इन मवेशियों के कारण आए दिन छोटी बड़ी सड़क दुर्घटनाएं हो रही है पर इस ओर ना तो प्रशासन का और ना ही कोई संगठन का इस ओर ध्यान जा रहा है। अगर इस पर नियंत्रण नहीं हुआ तो मुख्य मार्ग पर सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी रहेगा जिसने ना केवल पशुधन की क्षति होगी बल्कि राहगीरों का भी जान-माल नुकसान होगा।

नाम के लिये बने गौ-सेवक

जिले भर में आवारा पशुओं के साथ हो रही दुर्घटनाओं को लेकर सड़कों में विरोध करने वाले गौ-सेवक संगठनों को शायद दिखाई नहीं दे रहा है कि बीच सड़क पर बैठ कर आवारा पशु स्वयं दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं। जब घटना घट जाती है तब गौ-सेवक जागते हैं। लोगों का कहना है कि गौ-सेवकों को इस विषय पर काम करना चाहिए कि पशु मालिक अपने जानवरो को आवारा न छोड़े, वहीं जानवर रखने का स्थान न हो तो गौ-शाला में भेज दें, लेकिन इस विषय पर काम नहीं करते बल्कि जानवरों के साथ होने वाली दुर्घटना का इंतजार करते हैं और सड़कों पर अपने नाम के लिये विरोध दर्ज करते हैं जबकि गौ-सेवकों को मूल विषय पर काम करना चाहिए जिससे वह काफी दूर हैं।

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रात में वाहन चालकों को होती है समस्या

बीच सड़क पर बैठे आवारा पशुओं के साथ होने वाली दुर्घटना के संबंध में लोगों से चर्चा हुई तो उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा रात के समय वाहन चालकों को समस्या होती है। कुछ आवारा पशु ऐसे हैं जिनका रंग काला होता है और बीच सड़क पर झुम्मड़ लगाकर बैठे रहते हैं। तेज गति से आवागमन वाले वाहन चालकों को ये जानवर दिखाई नहीं देते जिसके कारण दुर्घटना घट जाती है। आवारा पशुओं का झुम्मड़ क्षेत्रों में दिखाई देता हैं, वहीं बीच सड़क पर इक्ठ्ठे बैठ जाते हैं जिसके कारण वाहनो के आवागमन में परेशानियां होती हैं। इन जानवरों को इसी तरह आवारा छोड़कर रखा गया तो एक दिन बड़ा हादसा भी हो सकता है। लोगों का कहना है कि शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र सभी मुख्य मार्गों में आवारा पशु बीच सड़क पर बैठ कर दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं। इस पर जिला प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।

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