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Harda: लोगों को भ्रमित कर राजनीति लाभ लेने के लिऐ भाजपा द्वारा जनहित के ज्वलंत मुद्दों को किया जा रहा है दरकिनार - ओम पटेल

शांति का टापू कहां जाने वाला मध्यप्रदेश अपराध की ओर तेजी से बढ़ रहा है । ऐसा कोई अपराध नहीं जो मध्यप्रदेश में ना हो रहा हो।अवैध कारोबार तेजी से पांव पसार रहा है और अव्वल होने की दिशा में निरंतर प्रयत्नशील है ।

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By Ankush Baraskar
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Harda/संवाददाता मदन गौर हरदा :- मध्यप्रदेश में स्वार्थपरता की राजनीति चरम सीमा पर है। निजी स्वार्थों के चलते जनहित के ज्वलंत मुद्दों से भाजपा नेता मुंह मोड़ लेते है। किसानों पर संकट काल में किसान को राहत की जगह घुटन दे रही सरकार मध्यप्रदेश में नंगा नाच तो देखो इस संकट काल में किसान संकटग्रस्त मे जहाँ जनता को राहत मिलना चाहिऐ  इस वर्ष वैसे भी किसान की फसल गेहूं चना का उपज कम बैठी आय कम खर्च ज्यादा किसानों की रवि और खरीब की फसल का उत्पादन कम रहा ऐसे में किसानों को 2700 सौ प्रतिकुटल सरकार को देना चाहिए आपने विधानसभा के चुनाव में फायदा किया था वो जुमला साबित हुआ। 

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अब 2400 में गेहूं खरीद रहे ये सरासर किसान को धोखाधड़ी की और रही बात ग्रीष्म कालीन मूंग की फ़सल हेतु 12 तारीख की मीटिंग मे 20 मार्च को पानी छोड़ने का प्रस्ताव पर 30मार्च कैसे यह समझ से परे पूछता हरदा जिले का किसान और किसान को भ्रमित कर रहे हो हरदा जिले की दोनों विधानसभा में कांग्रेस विधायक हैं इस बार पानी नहर का नहीं मिलेगा। और ऐसे मुद्दों को तूल दे रहे है, जिससे जनहित का कोई सरोकार नहीं है।  राजनीति में भाजपा नेता इस क़दर उलझे हुए हैं कि जनहित को भूल गए हैं, जबकि जनसमस्याओं से प्रभावित लोगों का जीवन नारकीय हो गया है।

बढ़ती महँगाई,बेरोजगारी, ,,कर्जमाफी, मुआवजा, किसानों की दुर्दशा ,मां नर्मदा के पावन तट पर हो रहे अवैध उत्खनन और परिवहन आदि ऐसी समस्याएं हैं, जिससे क्षेत्र का विकास अवरुद्ध होने के अलावा जनजीवन प्रभावित है, फिर भी इस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है । आवश्यकता, मांग, शिकायत को नजरअंदाज कर जहां जनहित की उपेक्षा की जा रही है । वहीं स्वार्थ की राजनीति  को तूल दिया जा रहा है । जनता का ध्यान भटकाने के लिए स्वार्थ की राजनीति का सहारा लिया जा रहा है। जो अत्यंत चिंताजनक और विचारणीय है ।

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शांति का टापू कहां जाने वाला मध्यप्रदेश अपराध की ओर तेजी से बढ़ रहा है । ऐसा कोई अपराध नहीं जो मध्यप्रदेश में ना हो रहा हो।अवैध कारोबार तेजी से पांव पसार रहा है और अव्वल होने की दिशा में निरंतर प्रयत्नशील है । विकास की अनदेखी कर अपने कर्तव्य से राजनेता विमुख होकर मध्यप्रदेश को बदनाम कर रहे हैं और साथ में विकास मामले में मध्यप्रदेशको पीछे छोड़ रहे हैं । कर्ज माफी ,मुआवजा, फसल नुकसान की तरफ तनिक भी ध्यान नहीं है जबकि इसके चलते किसान आर्थिक बोझ तले दबे हुए हैं और वे किंमकर्तव्यविमुढ वाली स्थिति में हैं ।

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हताशा, निराशा,और उदासी के माहौल में किसान जीवन यापन कर रहे है। पूर्व में कर्ज के बोझ तले दबे कई किसानों ने आत्महत्या के शिकार हुए कर्ज तले दबे हुए हैं।, फिर भी विकास के मुद्दे से भाजपा नेता भटके हुए हैं स्वार्थ राजनीति में अपना बेशकीमती समय गंवा कर विकास में रोड़ा बने हुए हैं । इससे विकास की रफ्तार तो धीमी होती ही है, साथ में मध्यप्रदेश में अराजकता, भय ,आतंक,दहशत, अशांति का माहौल बनता जा रहा है। जो निकट भविष्य में मध्यप्रदेश को विकास की बजाय विनाश की ओर ले जाएगा। जो माहौल बना है और बन रहा है उसके मद्देनजर ऐसी संभावनाओं से कतई इंकार नहीं किया जा सकता।

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