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भगवान भोलेनाथ के जटाओ में क्यों समाई गंगा जाने पूरा रहस्य

हिंदू धर्म में गंगा नदी को बहुत पवित्र माना जाता है. गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है और ऐसा माना जाता है कि इससे व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं. गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान और पूजा करने का विधान है।

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By Himanshu Ghodki
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हिंदू धर्म में गंगा नदी को बहुत पवित्र माना जाता है. गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है और ऐसा माना जाता है कि इससे व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं. गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान और पूजा करने का विधान है. आइए, विस्तार से जानते हैं गंगा सप्तमी के बारे में.....

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गंगा सप्तमी का महत्व 

गंगा सप्तमी का पर्व हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है. इस साल ये पर्व 14 मई, 2024 को मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं. इसलिए, गंगा सप्तमी को गंगा जयंती के रूप में भी जाना जाता है. इस दिन गंगा स्नान कर सभी पापों से मुक्ति पाने की कामना की जाती है.

गंगा सप्तमी 2024 तिथि और समय 

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सप्तमी तिथि आरंभ - 13 मई, 2024 शाम 05:20 बजे
सप्तमी तिथि समाप्त - 14 मई, 2024 शाम 06:49 बजे
गंगा सप्तमी पूजा विधि (Ganga Saptami Puja Vidhi)
गंगा सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें.
अगर गंगा में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर नहाने के पानी में थोड़ा गंगा जल मिला लें.
स्नान के बाद माँ गंगा की तस्वीर के सामने या बहते गंगा जल में फूल, सिंदूर, अक्षत, गुलाल, लाल फूल और लाल चंदन चढ़ाएं.
इसके बाद दीपक जलाकर आरती करें.
अंत में मां गंगा से जीवन में सुख-शांति की कामना करें.
धार्मिक मान्यता है कि गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. साथ ही, उसे सभी पापों और रोगों से मुक्ति मिलती है.

गंगा सप्तमी की कहानी 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां गंगा पहले दशमी तिथि को पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, जिसे गंगा दशहरा के नाम से जाना जाता है. लेकिन ऋषि जह्नु ने सारा गंगाजल पी लिया था. तब देवताओं और राजा भगीरथ ने उनसे गंगा को छोड़ने का अनुरोध किया. इसके बाद, सप्तमी तिथि को गंगाजल फिर से पृथ्वी पर आया और इसीलिए इस दिन को जह्नु सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है.

एक अन्य कथा के अनुसार, राजा भगीरथ अपने पूर्वजों के पापों से मुक्ति पाने के लिए गंगा को धरती पर लाना चाहते थे. उन्होंने कठोर तपस्या की और भगवान ब्रह्मा ने उन्हें वरदान दिया कि गंगा पृथ्वी पर अवतरित होगी. लेकिन, भगवान शिव को प्रसन्न करके ही वे गंगा की प्रचंड धारा को संभाल सकते थे. इसलिए भगीरथ ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की और इसी पवित्र दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं. इसलिए, गंगा को भगीरथी के नाम से भी जाना जाता है.

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