Baba Ramdev पर सक्त हुआ SC…,कोर्ट ने लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के विज्ञापनों को लेकर चल रहे मामले पर एक फटकार लगाई है।

कोर्ट ने कहा है कि विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटी और सोशल मीडिया प्रभावित करने वाले लोग भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।

केंद्र सरकार द्वारा साल 2022 में जारी किए गए भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित सरकारी दिशानिर्देशों का भी उल्लेख किया गया है।

भ्रामक विज्ञापन को परिभाषित करने के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28) का उपयोग किया जाता है।

भ्रामक विज्ञापन में उत्पाद या सेवा के बारे में गलत जानकारी दी जाती है या उपभोक्ताओं को गुमराह करने की संभावना रखती है।

विज्ञापन में ऐसी कोई बात नहीं बताई जानी चाहिए जिसका कोई वैज्ञानिक आधार न हो।

विज्ञापन में दिखाए गए सामान या सेवाएं उपभोक्ताओं को उनकी सुरक्षा को लेकर गुमराह नहीं करती हैं।

विज्ञापन में उत्पाद का समर्थन करने वालों को अपनी राय वास्तविक होनी चाहिए और यह भ्रामक नहीं होनी चाहिए।

भारतीय पेशेवरों को किसी भी विज्ञापन में किसी पेशे का समर्थन करने से मना किया गया